डॉक्टर की क्लिनिक के चक्कर और डरावनी रिपोर्ट्स: फर्टिलिटी टेस्ट्स की एंग्जायटी से खुद को कैसे बचाएं?1 min read

शादी के बाद, हर आम भारतीय लड़की की तरह मेरे मन में भी माँ बनने की एक गहरी और खूबसूरत उत्सुकता थी। मेरी शादी 30 साल की उम्र में हुई थी। हमारे समाज में जहाँ लड़कियों की शादी की एक अघोषित ‘एक्सपायरी डेट’ तय कर दी जाती है, वहाँ 30 की उम्र में शादी होना ही रिश्तेदारों के लिए गॉसिप का विषय बन जाता है। खैर, शादी के साल भर बाद ही, परिवार और घरवाले कहने लगे कि अब देर मत करो, उम्र निकल रही है। उनके बार-बार टोकने और कहने पर मैं पहली बार डॉक्टर के पास गई।

मैंने अपनी गाइनोकॉजिस्ट (Gynecologist) को बताया, “डॉक्टर, मेरी शादी को एक साल हो गया है और अभी तक मैंने कंसीव (Conceive) नहीं किया है। क्या मुझे या मेरे पति को कोई टेस्ट करवाना चाहिए?”

मेरी डॉक्टर बहुत समझदार थीं। उन्होंने मुझे मुस्कुराकर देखा और बहुत ही रिलैक्स टोन में कहा, “देखो, अभी पैनिक करने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है। कम से कम 1 साल तक नॉर्मली और बिना किसी तनाव के ट्राई करो, उसके बाद ही हम किसी भी तरह के मेडिकल टेस्ट के बारे में सोचेंगे।” डॉक्टर ने मुझे कुछ बहुत ही सामान्य और ज़रूरी बातें बताईं, जिनमें सबसे मुख्य था—स्ट्रेस (Stress) और एंग्जायटी से पूरी तरह दूर रहना।

लेकिन हमारे समाज, रिश्तेदारों और कभी-कभी तो खुद हमारे घरवालों की विडंबना देखिए—वे यह बुनियादी बात ही भूल जाते हैं कि यदि होने वाली माँ खुद मानसिक रूप से सामान्य और खुश महसूस नहीं करेगी, तो उसका शरीर एक नन्ही सी जान को गर्भ में कैसे धारण कर पाएगा?

क्लिनिक की सफेद दीवारें और ‘द साइलेंट डिप्रेशन’

जब डॉक्टर ने कहा कि अभी टेस्ट की ज़रूरत नहीं है, तो मुझे तसल्ली मिली। लेकिन घर के भीतर का माहौल पूरी तरह बदल चुका था। ऐसे नाज़ुक समय पर, जहाँ घर के बड़ों को संबल और सहारा देना चाहिए, वहाँ वे सबसे ज्यादा क्रूर और असहज व्यवहार करने लगते हैं। हर त्योहार, हर गेट-टुगेदर में मुझे अजीब नजरों से देखा जाने लगा।

मैं बहुत ज्यादा डिप्रेस रहने लगी थी। मेरे पति भी शुरुआत में यह नहीं समझ पा रहे थे कि मैं छोटी-छोटी बातों पर इतना पैनिक (Panic) क्यों हो रही हूँ, इतना घबरा क्यों रही हूँ। वे अक्सर मुझसे कहते, “अगर बच्चा नहीं हुआ तो कोई बात नहीं, हम दोनों साथ में खुश हैं ना।” लेकिन वे एक पुरुष के नजरिए से सोच रहे थे। वे यह बात नहीं समझ पा रहे थे कि उन्हीं के सगे रिश्तेदार मेरे पीठ पीछे और मेरे सामने मुझे कितना भला-बुरा कहने लगे थे। तानों का स्तर इतना गिर चुका था कि लोग सीधे मेरे वजूद पर उंगली उठाने लगे थे।

मैं एक ऐसे गहरे कुएं में गिरती जा रही थी, जहाँ चारों तरफ सिर्फ़ सन्नाटा था। इंटरनेट और गूगल पर सर्च करने पर मुझे हर तरह के अवसाद (Depression) की जानकारी तो मिल जाती थी, लेकिन ऐसे किसी डिप्रेशन के बारे में कुछ नहीं लिखा था, जिसमें उन महिलाओं के दर्द की बात हो जो दिल से कंसीव करना चाहती हैं, जिनकी शादी को एक साल से लेकर 15 साल हो गए हों, जो उदास हों और बस किसी को बिना किसी जजमेंट या ‘मुफ्त की अनचाही सलाह’ के अपनी सच्ची फीलिंग्स बताना चाहती हों।

Feeling inadequate when not conceiving naturally (प्राकृतिक रूप से गर्भधारण न कर पाने पर खुद को कमतर और अपराधी समझना) एक ऐसा साइलेंट किलर है, जिससे दुनिया भर में लाखों महिलाएं हर दिन अकेले जूझ रही हैं, लेकिन समाज की चुप्पी (Infertility, Silence) के कारण उनकी मदद करने वाला कोई नहीं है।

पीरियड्स के रूढ़िवादी नियम: जब अंधविश्वास हावी होने लगा

एक तरफ कंसीव न होने की चिंता, दूसरी तरफ क्लिनिक के चक्कर और रिपोर्ट्स का खौफ… और इन सबके बीच अंधविश्वास का एक नया तड़का लगा दिया गया। मेरे ससुराल में पीरियड्स (मासिक धर्म) को लेकर बहुत ही अजीब और सख्त नियम थे। वहाँ पीरियड्स के दिनों में खाना बनाना, अपने कमरे से बाहर निकलना, और यहाँ तक कि घर की सामान्य चीज़ें जैसे बेड, सोफा, या रेफ्रिजरेटर (फ्रीज) को भी छूना पूरी तरह वर्जित था। किचन की दहलीज़ लांघना तो पाप के बराबर माना जाता था।

आज भी भारत की बहुत सारी फैमिलीज़ ऐसी हैं जहाँ पीरियड्स में किचन में जाना और खाना बनाना मना होता है। मुझे भी यह सब शादी के बाद ही पता चला था। चूंकि मैं और मेरे पति अपने इन-लॉज से दूर दूसरे शहर में अकेले रहते थे, हम दोनों ही वर्किंग थे, और मैंने अपनी पूरी जिंदगी में पहली बार इस तरह के नियमों के बारे में सुना था। इसलिए, मैंने अपनी मदर-इन-लॉर (सास) को बहुत ही विनम्रता (Politely) से स्पष्ट कर दिया था कि हमारी जॉब और लाइफस्टाइल ऐसी है कि हम अकेले रहकर इस तरह की रूढ़िवादी प्रथाओं का पालन नहीं कर सकते।

लेकिन मेरी सासू मां का यह दृढ़ विश्वास था कि जब तक मैं पीरियड्स में खाना बनाऊंगी और किचन में जाऊंगी, तब तक भगवान मुझसे नाराज रहेंगे और मुझे माँ बनने की खुशी कभी नहीं देंगे! यह बात मेरी समझ में बिल्कुल नहीं आई कि जो भगवान पूरी सृष्टि का रचयिता है, वो एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया के कारण अपनी ही बेटी से ऐसा बदला क्यों लेगा? मेरे मायके में इतने सारे लोग थे—मेरी माँ, चाची, बहनें—जो सब पीरियड्स में भी सामान्य रूप से किचन संभालती थीं और खाना बनाती थीं, उन सबको भगवान ने माँ बनने का सौभाग्य दिया, तो मुझे क्यों नहीं देंगे?

मिथक बनाम वास्तविकता (Myth vs Reality)

  • मिथक (Myth): पीरियड्स में खाना बनाने या घरेलू काम करने से शरीर अशुद्ध हो जाता है और भगवान की नाराजगी के कारण कंसीव करने में प्रॉब्लम आती है।

  • वास्तविकता (Reality): चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, पीरियड्स के दौरान खाना बनाने या सामान्य दिनचर्या का पालन करने से महिला की प्रजनन क्षमता (Fertility) पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। पीरियड्स इस बात का सबूत हैं कि महिला का गर्भाशय हर महीने एक नई जिंदगी को अपनाने के लिए खुद को तैयार करता है। यह एक पूरी तरह से प्राकृतिक और पावन प्रक्रिया है, इसका किसी भी तरह के अंधविश्वास या फर्टिलिटी ब्लॉकेज से कोई संबंध नहीं है।

थायराइड की रिपोर्ट और समाज का नया ‘सर्टिफिकेट’

इन्हीं मानसिक तनावों और अंधविश्वासों के बीच, मेरे पीरियड्स अचानक इर्रेगुलर (अनियमित) होने लगे। क्लिनिक के डरावने माहौल और टेस्ट्स की एंग्जायटी (anxiety during fertility tests and medical reports) के बावजूद मैंने डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी समझा। डॉक्टर ने मेरे कुछ ज़रूरी ब्लड टेस्ट करवाए। जब लैब से रिपोर्ट आई, तो डर के मारे मेरे हाथ कांप रहे थे। रिपोर्ट में आया कि मेरा थायराइड (Thyroid) बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ था। डॉक्टर ने मुझे तसल्ली देते हुए 3 महीने की दवाइयाँ शुरू कीं और कहा कि बाकी सब कुछ बिल्कुल नॉर्मल है, दवा से थायराइड ठीक होते ही सब ठीक हो जाएगा।

लेकिन जैसे ही यह बात मेरे रिश्तेदारों को पता चली, उन्होंने मुझे एक नया सर्टिफिकेट थमा दिया: “इसको तो अब कभी बच्चे नहीं हो सकते, क्योंकि 31 साल की उम्र में इसे थायराइड हो गया है, और थायराइड वाली औरतों के बच्चे कभी ठहरते ही नहीं हैं!”

मिथक बनाम वास्तविकता (Myth vs Reality)

  • मिथक (Myth): थायराइड होने के बाद महिला कभी भी माँ नहीं बन सकती और फर्टिलिटी टेस्ट्स में अगर थायराइड आ जाए तो कंसीव करना नामुमकिन है।

  • वास्तविकता (Reality): यह धारणा पूरी तरह से गलत है। थायराइड का बढ़ा होना (Hypothyroidism) आपके हार्मोन्स को असंतुलित कर सकता है जिससे ओव्यूलेशन में अस्थाई देरी हो सकती है। लेकिन जैसे ही आप डॉक्टर की सलाह से सही दवा (Thyroxine) लेना शुरू करते हैं, थायराइड का स्तर बिल्कुल सामान्य हो जाता है। सही इलाज के साथ थायराइड से पीड़ित लाखों महिलाएं बेहद स्वस्थ बच्चों को जन्म देती हैं।

द हीलिंग गाइड: मैंने खुद को इस चक्रव्यूह से कैसे निकाला? (5 मैजिकल टिप्स)

मेरी मेंटल हेल्थ बहुत ज्यादा खराब होने लगी थी। तब मेरे पति ने मेरे व्यवहार में आ रहे इन डरावने बदलावों को सबसे पहले पहचाना। उन्होंने मुझे समझाया कि मैं खुद को खोती जा रही हूँ और उन्होंने मेरी मेंटल हेल्थ को ठीक करने में मेरी सबसे बड़ी मदद की। मैंने अपनी दवाइयाँ समय पर लेना शुरू कीं और खुद को बदलने का फैसला किया। अगर आप भी क्लिनिक के चक्करों और डरावनी रिपोर्ट्स से परेशान हैं, तो मेरे ये 5 आजमाए हुए तरीके आपकी जिंदगी बदल सकते हैं:

1. खुद से बेइंतहा प्यार करो (Self-Love)

सबसे पहले खुद को हीनभावना से बाहर निकालो। अपनी बॉडी को कोसो मत, बल्कि उसे इतना प्यार और सम्मान दो कि कोई और नन्ही सी जान उसमें रहने के लिए उत्सुक हो सके। आपकी बॉडी एक मंदिर है, इसे तानों का घर मत बनने दो।

2. टॉक्सिक रिश्तेदारों से मेंटल डिस्टेंस बना लो

ऐसे रिश्तेदारों से खुद को मानसिक रूप से पूरी तरह दूर कर लो जो तुम्हें दुःख देते हैं। यह कड़वा सच हमेशा याद रखना कि जब कल को तुम्हारा बच्चा हो जाएगा, तब भी इन ताने मारने वाले लोगों में से कोई भी तुम्हारी मदद करने या बच्चा संभालने नहीं आएगा। तो उनके तानों को दिल से क्यों लगाना?

3. इन-लॉज के साथ ‘माइंड-शिफ्ट’ गेम खेलो

अगर आप अपने इन-लॉज (ससुराल वालों) के साथ रहती हैं और लगातार प्रेशर महसूस करती हैं, तो खुद को फिजिकली तो अलग नहीं कर सकतीं, लेकिन मेंटली अलग कर लें। जब भी सासू मां कुछ कहें, तो ऐसा सोचें कि वे आपकी सगी सास नहीं बल्कि आपकी दूर की बुआ सास या मौसी सास हैं, जिनकी बातों को आप ज्यादा सीरियसली नहीं लेतीं।

4. अपनी गायनी (Gynecologist) पर भरोसा रखो, या डॉक्टर बदलो

अपनी डॉक्टर की बात मानो। लेकिन अगर किसी क्लिनिक में जाने पर आपको पॉजिटिव वाइब्स नहीं आ रहीं, या डॉक्टर आपको ढांढस बंधाने के बजाय डरा रहा है, तो बिना संकोच किए किसी दूसरे अच्छे और सहृदय गाइनोकॉजिस्ट से कंसल्ट (Consult) करें।

5. सजकर रहो और खुश रहो (The Hormone Booster)

अगर आप एक इंडियन लड़की हैं, तो घर पर भी बहुत अच्छे से, खूबसूरत साड़ियां या सूट्स पहनकर, बिंदी लगाकर तैयार होकर रहिए। ट्रस्ट मी, जब आप आईने में खुद को खूबसूरत और खुश देखती हैं, तो आपके और आपके पार्टनर के सारे हार्मोन्स अपने आप बैलेंस होने लगते हैं। कई बार महंगे आईवीएफ (IVF) भी फेल हो जाते हैं, क्योंकि मन खुश नहीं होता। अगर कोई बहुत बड़ी मेडिकल प्रॉब्लम नहीं है, तो अपने भीतर ये छोटे-छोटे बदलाव करने से आपकी बॉडी एक बच्चे का सबसे सुंदर घर बन सकती है। हमेशा याद रखिए—“एक प्लेट में खाना खाने से बच्चे नहीं होते, मन के मिलने और खुश रहने से होते हैं।”

ओव्यूलेशन (Ovulation) को समझें: माँ बनने का सही गणित

कंसीव करने के लिए आपको अपने पीरियड साइकिल (Period Cycle) और ओव्यूलेशन साइकिल (Ovulation Cycle) की डेट को नोट करके रखना चाहिए। आजकल मोबाइल में बहुत सारे ऐसे ऐप्स (Apps) आते हैं जहाँ आप अपने पीरियड की डेट डालकर अपने कंसीव करने के सबसे हाई चांस वाले दिनों को आसानी से ट्रैक कर सकती हैं।

प्रैक्टिकल टिप: ओव्यूलेशन का मतलब वो दिन होते हैं जब आपके शरीर के अंदर से अंडे रिलीज होते हैं। इसे पहचानने का सबसे आसान तरीका है कि उस समय शरीर से सफेद अंडे की जर्दी (Egg white discharge) जैसा गाढ़ा पदार्थ निकलता है। उसके निकलने से पहले और उसके दौरान ही आपको ट्राई करना है। यह समय आमतौर पर पीरियड्स शुरू होने के 8वें दिन से लेकर 13वें दिन के बीच का होता है। यदि इस समय आप ट्राई करती हैं, तो कंसीव करने के चांसेस सबसे ज्यादा होते हैं।

हमेशा याद रखिए—अगर आपके पीरियड्स आते हैं, इसका सीधा मतलब है कि आप माँ बन सकती हैं! और यह चमत्कार किसी भी उम्र की महिला के साथ हो सकता है। खुश रहिए और हर दिन आईने के सामने खुद से कहिए—“मैं माँ बनने के लिए पूरी तरह तैयार हूँ, और मैं एक बहुत अच्छी, स्वस्थ और खुश माँ बनूंगी।”

मेरी इस बदली हुई सोच, पति के अटूट सपोर्ट और खुशहाल लाइफस्टाइल का ही नतीजा था कि शादी के ठीक 2 साल बाद, 33 साल की उम्र में मैंने पहली बार सफलतापूर्वक कंसीव किया ! 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. फर्टिलिटी टेस्ट्स की रिपोर्ट्स आने से पहले होने वाली घबराहट (Anxiety) को कैसे कंट्रोल करें?

काम का जवाब: रिपोर्ट आने से पहले गहरी सांसें लें, कोई अच्छी फिल्म देखें या खुद को व्यस्त रखें। यह समझें कि रिपोर्ट सिर्फ़ एक स्टेटस है, आपकी जिंदगी का फैसला नहीं।

चुलबुला जवाब: ईमेल या व्हाट्सएप पर आई पीडीएफ (PDF) रिपोर्ट को खुद अकेले जासूस की तरह मत खोलिए। सीधे डॉक्टर के पास ले जाइए, ताकि बड़े-बड़े मेडिकल शब्दों का भूत आपको डरा न सके!

2. डॉक्टर ने कहा है कि 1 साल तक नॉर्मली ट्राई करो, तो क्या मुझे घरवालों के दबाव में आकर तुरंत टेस्ट करवाने चाहिए?

काम का जवाब: बिल्कुल नहीं। डॉक्टर की सलाह मानें। शरीर को नए रिश्ते और माहौल में ढलने के लिए कम से कम एक साल का स्वाभाविक समय चाहिए होता है।

चुलबुला जवाब: रिश्तेदारों की बातों में आकर क्लिनिक के चक्कर काटना बंद कीजिए। शादी आपकी हुई है, फूफाजी या चाची जी की नहीं! डॉक्टर पर भरोसा रखिए, मोहल्ले की आंटियों पर नहीं।

3. जब इनफर्टिलिटी टेस्ट्स के दौरान पति हमारी एंग्जायटी या पैनिक को न समझें, तो क्या करें?

काम का जवाब: उनसे बैठकर खुलकर बात करें कि आप अंदर से कैसा महसूस कर रही हैं। उन्हें समझाएं कि आपको उनसे सिर्फ़ एक सुरक्षात्मक ढाल और सपोर्ट चाहिए।

चुलबुला जवाब: उन्हें अपने साथ डॉक्टर के केबिन के अंदर ले जाइए। जब डॉक्टर साहब उन्हें समझाएंगे कि ‘स्ट्रेस से केस बिगड़ सकता है’, तो पतिदेव खुद आपके सामने रिश्तेदारों के खिलाफ ढाल बनकर खड़े हो जाएंगे!

4. क्या लगातार क्लिनिक के चक्कर काटने और मेडिकल स्ट्रेस से फर्टिलिटी पर असर पड़ता है?

काम का जवाब: हाँ, क्लिनिक की सफेद दीवारें, सुइयां और लगातार टेस्ट्स का डर शरीर में कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) बढ़ा देता है, जिससे ओव्यूलेशन गड़बड़ा सकता है।

चुलबुला जवाब: बिल्कुल! जब आप हर हफ्ते क्लिनिक की सीढ़ियां चढ़ेंगी, तो आपके हार्मोन्स बच्चे की तैयारी करने के बजाय खुद को किसी मेडिकल इमरजेंसी मोड में समझकर डर जाएंगे। इसलिए थोड़ा ब्रेक लीजिए और चिल कीजिए।

5. ओव्यूलेशन (Ovulation) क्या होता है और कंसीव करने के लिए सबसे सही दिन कौन से हैं?

काम का जवाब: पीरियड्स शुरू होने के 8वें दिन से 13वें दिन का समय ओव्यूलेशन का होता है, जब ओवरी से अंडा रिलीज होता है। इस समय कंसीव करने के चांस सबसे हाई होते हैं।

चुलबुला जवाब: यह आपके शरीर का वो ‘गोल्डन ऑवर’ (Golden Hour) है जब कंसीव करने की संभावना 100 की स्पीड पर होती है। इसे ट्रैक करने के लिए किसी बाबा के पास नहीं, बल्कि अपने फोन के फर्टिलिटी ऐप पर भरोसा करें!

6. क्या पीरियड्स नियमित आने का मतलब यह है कि मैं निश्चित रूप से माँ बन सकती हूँ?

काम का जवाब: हाँ, नियमित पीरियड्स इस बात का बहुत बड़ा और सकारात्मक संकेत हैं कि आपका रिप्रोडक्टिव सिस्टम (प्रजनन तंत्र) एक्टिव और स्वस्थ है। उम्र चाहे जो हो, आप माँ बन सकती हैं।

चुलबुला जवाब: पीरियड्स का हर महीने समय पर आना इस बात का प्रमाण है कि आपकी बॉडी की ‘फैक्ट्री’ चालू है। अब रिश्तेदारों के तानों के ‘शटर’ को अपने दिमाग में पूरी तरह बंद कर दीजिए।

7. अगर बार-बार आईवीएफ (IVF) या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट फेल हो रहे हों, तो मानसिक रूप से खुद को कैसे संभालें?

काम का जवाब: कुछ समय के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट से ब्रेक लें। अपनी मेंटल हेल्थ को ठीक करने के लिए काउंसलिंग की मदद लें, योग करें और खुद को प्रकृति के करीब लाएं।

चुलबुला जवाब: लगातार फेलियर का मतलब यह नहीं कि आपमें खराबी है। इसका मतलब है कि आपकी बॉडी और माइंड को अभी थोड़े ‘वेकेशन’ और ‘नो-डॉक्टर’ ज़ोन की ज़रूरत है। बैग पैक कीजिए और घूम कर आइए!

8. जॉइंट फैमिली में रहते हुए फर्टिलिटी प्रेशर से खुद को मेंटली दूर कैसे करें?

काम का जवाब: इन-लॉज की बातों को बहुत ज्यादा व्यक्तिगत रूप से न लें। अपने दिमाग में एक ‘माइंड-शिफ्ट’ करें कि वे आपकी सगी सास नहीं बल्कि कोई दूर की रिश्तेदार हैं।

चुलबुला जवाब: जब भी घर में बच्चों को लेकर चर्चा शुरू हो, अपने कानों में अदृश्य ‘नॉइज़ कैंसिलेशन’ मोड ऑन कर लीजिए। सिर हिलाइए, मुस्कुराइए और अपने कमरे में जाकर बढ़िया साड़ी पहनकर तैयार हो जाइए!

9. क्या सच में खुश रहने, सजने-संवरने और लाइफस्टाइल बदलने से कंसीव करने के चांस बढ़ते हैं?

काम का जवाब: बिल्कुल। जब आप सजती-संवरती हैं और खुश रहती हैं, तो दिमाग में एंडोर्फिन और डोपामाइन जैसे हैप्पी हार्मोन्स रिलीज होते हैं जो प्रजनन क्षमता को बूस्ट करते हैं।

चुलबुला जवाब: 100% सच! जब आप एक सुंदर साड़ी पहनकर आईने के सामने मुस्कुराएंगी, तो आपके हार्मोन्स भी कहेंगे—”वाह! बॉस खुश है, चलो अब अपना काम (कंसीव करने की तैयारी) शुरू करते हैं!”

10. “We Grow Together” कम्युनिटी मेडिकल रिपोर्ट्स और क्लिनिक के इस डरावने सफर में महिलाओं का साथ कैसे देती है?

काम का जवाब: We Grow Together एक ऐसा सुरक्षित मंच (Safe Space) है जहाँ आप जैसी हज़ारों महिलाएं अपने दिल का हाल बयां करती हैं। यहाँ आपको बिना किसी जजमेंट के मानसिक संबल और सही गाइडेंस मिलता है।

चुलबुला जवाब: यह एक ऐसी सहेलियों की महफ़िल है, जहाँ कोई चाची या मौसी आपको दालचीनी का पानी पीने की सलाह नहीं देगी, बल्कि आपको गले लगाकर कहेगी—”तू जैसी है, परफेक्ट है। चिल कर, हम साथ मिलकर जीतेंगे!”

निष्कर्ष: आपकी खुशियाँ, आपका समय

क्लिनिक के चक्कर और मेडिकल रिपोर्ट्स सिर्फ़ आपके शरीर की एक तात्कालिक स्थिति को दर्शाते हैं, वे आपकी आत्मा या आपकी पूरी जिंदगी की काबिलियत का फैसला नहीं कर सकते। मातृत्व एक खूबसूरत पड़ाव है, लेकिन एक औरत का वजूद उससे कहीं बड़ा है।

अपनी खुशियों का रिमोट कंट्रोल समाज या रिश्तेदारों के हाथ में कभी मत दीजिए। खुश रहिए, खुद से प्यार कीजिए, अपने पति का हाथ थामिए और “We Grow Together” कम्युनिटी का हिस्सा बनकर इस सफर को आसान बनाइए।

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